India
सबसे कम टेस्टिंग रेट वाले देशों में शामिल भारत क्या सीखेगा कोरोना के साथ जीना?
- स्पेन और अमेरिका में सबसे ज्यादा संक्रमण की दर
- कोरोना के सबसे कम फैलाव रेट वाले देशों में भारत
भारत ने सोमवार को बंदिशों में अधिक छूट के साथ लॉकडाउन 4.0 में प्रवेश किया. इस मकसद के साथ कि इस तरह की छूट से अर्थव्यवस्था को दोबारा पटरी पर लाने में मदद मिलेगी. अब यह राज्यों पर निर्भर है कि वे किस तरह के उपाय करना चाहते हैं. यहां तक कि सरकार भी कह रही है लोगों को वायरस के साथ ही रहना सीखना होगा. तो सवाल यह है कि हमारे बीच पहले ही वायरस कितना फैल चुका है?
दुनिया के सर्वाधिक प्रभावित देशों में, टेस्ट किए गए हर 1,000 लोगों में से 1 से 6 का टेस्ट पॉजिटिव आया है. सबसे ज्यादा बोझ वाले देशों में स्पेन और अमेरिका में सबसे ऊंचा फैलाव रेट है. दुनिया में कम से कम 10,000 केस वाले 46 देशों में सबसे कम फैलाव रेट वाले देशों में भारत शामिल है. सिर्फ चीन और इंडोनेशिया में ही यहां से कम फैलाव रेट है
जबकि भारत ने हर एक लाख की आबादी पर 7 Covid-19 केस रिपोर्ट किए हैं, चीन और इंडोनेशिया में ये संख्या छह है. दूसरी ओर, स्पेन ने हर एक लाख की आबादी पर 591 केस दर्ज किए हैं. वहीं अमेरिका में ये आंकड़ा 456 का है.

भारत में केस की संख्या होने की वजह बेहतर नियंत्रण उपाय हो सकते हैं, या यह कम टेस्टिंग रेट के कारण हो सकता है. सिर्फ चार देशों- मैक्सिको, बांग्लादेश, इंडोनेशिया और मिस्र ने अपनी आबादी के अनुपात में भारत की तुलना में कम टेस्ट किए. भारत ने अपनी आबादी में सिर्फ 0.15% का ही टेस्ट किया है.

शहरों में, मुंबई में फैलाव रेट सबसे अधिक है. यहां कम से कम 0.1 प्रतिशत शहर की आबादी अब संक्रमित है. यह अन्य प्रमुख शहरों की तुलना में अभी भी कम है जैसे, न्यूयॉर्क शहर जहां 2.3 प्रतिशत आबादी का टेस्ट पॉजिटिव आया. लेकिन कम फैलाव रेट भी कम टेस्टिंग का नतीजा हो सकता है. केवल अधिक गंभीर केसों में ही टेस्टिंग करने के बावजूद, न्यूयॉर्क शहर ने अपनी आबादी के सिर्फ 7 प्रतिशत लोगों का ही टेस्ट किया. मुंबई के लिए संबंधित संख्या ज्ञात नहीं है, लेकिन कम से कम 10 गुना कम होने की संभावना है.

पांच सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में, टेस्ट पॉजिटिविटी रेट (TPR) महाराष्ट्र और गुजरात में ऊंचा हुआ है, ये संकेत है या फैलाव ज्यादा है या अधिक फोकस टेस्टिंग हो रही है. दिल्ली का TPR लगातार ऊंचा रहा है, और राजस्थान का लगातार कम रहा है. तमिलनाडु ने ऊंचे TPR से शुरुआत की, लेकिन बाद में गिरावट आई. ये इस वजह से हुआ क्योंकि राज्य ने टेस्टिंग को देश में सर्वाधिक ऊंचे स्तर तक पहुंचाया.

हालांकि ये संख्या केवल उन केसों के आधार पर "फैलाव" दिखाती है जो पॉजिटिव टेस्ट दे चुके हैं. ये कुल आबादी में फैलाव का संकेत नहीं देती. दो नेशनल सैंपल सर्वे बड़े पैमाने पर फैलाव की असल स्थिति का पता लगाने के लिए शुरू किए जाएंगे. लेकिन तब तक, दुनिया भर की स्टडीज इशारा कर रही हैं कि कि पहले से जो ज्ञात है, उसकी तुलना में आबादी की का कहीं बड़ा हिस्सा पहले से ही संक्रमित हो चुका होगा.
अगर भारत को वायरस के साथ रहना सीखना है तो उसे इतने बड़े स्तरों के लिए ही खुद को तैयार रखना होगा.
Credit Aaj Tak
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