
- मनरेगा को मिला 40 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट
- राहुल बोले- मनरेगा की दूरदर्शिता समझने के लिए धन्यवाद
कोरोना वायरस के संकट की इस घड़ी में देश के मजदूरों को राहत मिले, इसके लिए केंद्र सरकार ने मनरेगा के बजट में 40 हजार करोड़ रुपये की बढ़ोतरी की है. कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने सरकार के इस कदम की सराहना की है. राहुल गांधी ने एक ट्वीट कर सरकार का आभार जताया है.
राहुल गांधी ने ट्वीट में लिखा कि प्रधानमंत्री ने UPA काल में सृजित MNREGA स्कीम के लिए 40,000 करोड़ का अतिरिक्त बजट देने की मंज़ूरी दी है. MNREGA की दूरदर्शिता को समझने और उसे बढ़ावा देने के लिए हम उनके प्रति आभार प्रकट करते हैं.
बता दें, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज से जुड़ी पांचवीं और आखिरी चरण की घोषणाएं कीं. वित्त मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मंत्री ने कहा था कि आपदा को अवसर में बदलने की जरूरत है. उसी के मुताबिक ये आर्थिक पैकेज तैयार किया गया है. उन्होंने कहा कि इस पैकेज में लैंड, लेबर, लॉ, लिक्विडिटी पर जोर दिया गया है. वित्त मंत्री ने कहा कि शहरों से गांवों की ओर जा रहे प्रवासी मजदूरों को रोजगार की कमी न हो इसलिए मनरेगा का बजट 40,000 करोड़ रुपये बढ़ा दिया गया है. इसके अलावा पब्लिक सेक्टर के लिए उन्होंने नई नीति की भी घोषणा की.प्रधानमंत्री ने UPA काल में सृजित MNREGA स्कीम के लिए 40,000 करोड़ का अतिरिक्त बजट देने की मंज़ूरी दी है। MNREGA की दूरदर्शिता को समझने और उसे बढ़ावा देने के लिए हम उनके प्रति आभार प्रकट करते हैं।#ModiUturnOnMNREGA pic.twitter.com/XMOmhXhVeD
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) May 18, 2020
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इससे पहले शनिवार को कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष और सांसद राहुल गांधी ने वीडियो चैट के जरिए मीडिया से देश के हालात और सरकार के कामकाज को लेकर बात की थी. इस दौरान उन्होंने सरकार की ओर से जारी किए गए स्पेशल पैकेज को किसानों और मजदूरों के लिए नाकाफी बताया.
राहुल गांधी ने कहा, 'पूरा देश कठिनाई में है, लोग भूखे हैं, प्यासे हैं, सड़कों पर चल रहे हैं. जब बच्चों को चोट लगती है, तो मां बच्चे को कर्ज देने की बात नहीं करती, मां सबसे पहले बच्चे का जख्म देखती है और जो मेरी निराशा है और मैं राजनीतिक तौर से नहीं बोल रहा हूं, मैं हिंदुस्तान की जनता की ओर से बोल रहा हूं- जो पैकेज होना चाहिए, वो कर्ज का पैकेज नहीं होना चाहिए. आज डायरेक्ट किसानों की जेब में, मजदूरों की जेब में, जो हमारे माइग्रेंट वर्कर जो पैदल चल रहे हैं, उनकी जेब में एकदम सीधे पैसे डालने की जरूरत है.'
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Credit Aaj Tak
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